दीपिका पादुकोण से शादी के बाद रणवीर सिंह एक बार फिर से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाने के लिए तैयार हैं. उनकी फिल्म सिंबा (Simmba) दिसंबर 2018 के अंत में रिलीज होगी. दीपिका से शादी के बाद ये रणवीर की पहली फिल्म है. शादी के तुरंत बाद से ही रणवीर फिल्म के प्रमोशन में बिजी हो गए हैं. कुछ दिन पहले सिंबा का ट्रेलर रिलीज हुआ. अब फिल्म का पहला गाना भी लॉन्च कर दिया गया है.
सिंबा का पहला गाना डांस सॉन्ग है. इसे रणवीर सिंह और सारा अली खान पर फिल्माया गया है. दोनों को वीडियो में जबरदस्त डांस करते हुए देखा जा सकता है. गाने के बोल हैं ''आंख मारे''. ये एक फास्ट बीट सॉन्ग है. गाने की शुरुआत में करण जौहर भी नजर आ रहे हैं. साथ ही गाने के बीच में गोलमाल सीरीज की कास्ट भी डांस करते हुए दिखाई दी है. इसमें तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े और कुणाल खेमू शामिल हैं. इसके अलावा अरशद वारसी गाने के अंत में नजर आए हैं.
बता दें कि ये गाना 1996 की फिल्म ''तेरे मेरे सपने'' के हिट सॉन्ग ''आंख मारे'' का रीमेक है. ऑरिजनल गाना अरशद वारसी और प्रिया गिल पर फिल्माया गया था. इसे कविता कृष्णमूर्ति और कुमार सानू ने गाया था. इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे.
जबकि नए गाने को कुमार सानू, नेहा कक्कड़ और मीका सिंह ने गाया है. इसके लिरिक्स शब्बीर अहमद ने लिखे हैं. गाने को म्यूजिक तनिष्क बागची ने दिया है. रणवीर की तरफ से उनके चाहने वालों के लिए ये डांसिंग सॉन्ग किसी न्यू ईयर गिफ्ट से कम नहीं है.
फिल्म की बात करें तो सिंबा में रणवीर सिंह पहली दफा एक पुलिसवाले का रोल प्ले करते नजर आएंगे. फिल्म में उनके साथ फ्रेश टैलेंट, सारा अली खान हैं. सारा फिल्म केदारनाथ से अपना बॉलीवुड डेब्यू कर रही हैं. इसी के कुछ दिनों बाद ही उनकी दूसरी फिल्म सिंबा रिलीज होगी. फिल्म में अजय देवगन केमियो रोल में हैं.
अयोध्या का साधू बन गया सासंद
अयोध्या आंदोलन के चेहरे के तौर राम विलास वेदांती का नाम भी आता है. अयोध्या के बड़े साधुओं में नाम आता है. राम मंदिर आदोलन ने वेदांती को राजनीतिक पहचान दी और वो बीजेपी सांसद बने थे. मौजूदा समय में राम मंदिर निर्माण के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे है, लेकिन बीजेपी और सरकार में हाशिये पर हैं.
इसके अलावा बाबरी विध्वंस के दौरान राजमाता विजयराजे सिंधिया भी अयोध्या में मौजूद थीं, लेकिन उनका निधन हो चुका है. इसके अलावा स्वामी चिन्मयानंद भी अयोध्या आंदोलन के बड़े चेहरे थे, लेकिन मौजूदा समय में बीजेपी और सराकर- दोनों में कोई भूमिका नहीं है.
धूम मचाएंगे भोजपुरी के सुपरस्टार
Thursday, December 6, 2018
Wednesday, November 28, 2018
जल ही जीवन नहीं, जल ही ज़हर है जहां- ग्राउंड रिपोर्ट
प्रदूषण शब्द का इस्तेमाल करने से यह पता नहीं चल पाता कि हालात कितने डरावने हैं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंडन नदी के किनारे बसे गांवों के लोग अनेक बीमारियों से जूझ रहे हैं.
पानी पिए बिना जी नहीं सकते और जैसा पानी वे पी रहे हैं उसके बाद भी उनका जीना मुश्किल है.
नदी के किनारे बसे गांव ख़ुशहाल होते हैं, गांव में नदी होना ख़ुशक़िस्मती मानी जाती है, लेकिन एक गांव है गांगनौली, इस गांव की बदक़िस्मती यही है कि वह नदी के किनारे बसा है.
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से निकलने वाली नदी हिंडन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह ज़िलों बागपत, शामली, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ और ग़ाज़ियाबाद से होती हुई यमुना में मिलती है.
इन ज़िलों के 154 गांव हिंडन और इसकी सहायक नदियों कृष्णा और काली के किनारे बसे हैं और यहां के लोग इन ज़िलों में लगे कल-कारख़ानों की क़ीमत चुका रहे हैं.
अगर ऐसा होता तो गांव के लोग नदी का पानी पीने के बदले कुएं, ट्यूबवेल या हैंडपंप का पानी पी सकते थे. लेकिन ज़हरीला पानी ज़मीन के नीचे तक पहुंच चुका है यानी अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा.
वे जानते हैं कि हर घूंट के साथ ज़हर उनके शरीर में जा रहा है. गहरा भूरा, लाल पानी पीकर बीमारियां झेलना और मरना मानो इनकी नियति बन गई है.
यहां पानी में निकल, पारा, कैडमियम, सल्फ़ाइड, क्लोराइड जैसे जानलेवा हैवी मेटल काफ़ी ज़्यादा मात्रा में है, जिसके कारण गावों के हैंडपंप का पानी ज़हरीला हो चुका है ऐसे ही 154 गांवों में से एक है गांगनौली.
ईंट और मिट्टी से बनी सड़क पर चलते हुए हमारी मुलाक़ात जितेंद्र से हुई. जब हम जितेंद्र के घर पहुंचे तो उन्होंने पड़ोसी के घर से पानी मंगाया और बताया, ''हमारे घर में लगे नल का पानी हम नहीं पिला सकते. बग़ल वालों ने फ़िल्टर लगवाए हैं तो आपके लिए पानी ले आए.''
अपनी 12 साल की बेटी नेहा को गोद में लिए जितेंद्र बताते हैं, "पैदा हुई तो एक साल तक हमें सब कुछ ठीक लगता रहा लेकिन जब ये एक साल तक चलने की कोशिश भी नहीं कर सकी तो हमने डॉक्टर को दिखाया. उन्होंने बताया कि यहां के पानी के कारण इसके दिमाग़ पर असर पड़ा है और अंगों का विकास नहीं हो पा रहा है. अब इसका कोई इलाज नहीं हो सकता है, हमने डॉक्टर के पास जाना छोड़ दिया है."
ये कहते हुए वे बेबस नज़रों से अपनी बेटी को बार-बार देखते हैं और उसका सिर सहलाते हैं. जिस उम्र में नेहा को स्कूल जाना चाहिए, अपने हमउम्र बच्चों के साथ खेलना चाहिए उस उम्र में नेहा चल-फिर तक नहीं सकती, अपने हाथों से खाना नहीं खा सकतीं. यहां तक कि वह ये भी नहीं बता सकती कि उसे कब शौचालय जाना है. नेहा अकेली नहीं है बल्कि कई ऐसे बच्चे-नौजवान इस गांव में हैं जो जन्मजात अपंगता से जूझ रहे हैं.
साल 2016 में बागपत के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर ने गांगनौली गांव में एक मेडिकल सर्वे कराया था. उनकी रिपोर्ट के मुताबिक़, इस गांव में 37 लोग कैंसर, चर्म रोग, हैपेटाइटस और अपंगता जैसी समस्या से पीड़ित थे. इनमें से कुछ की मौत भी हो चुकी है. वहीं एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक़, इस गांव में बीते दो साल में 71 लोगों की मौत कैंसर से हुई है.
साल बदला लेकिन हाल नहीं
साल 2015 में 'दोआब पर्यावरण समिति' नाम के एक संगठन की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि जिन भी ज़िलों का पानी प्रदूषित है वहां स्वच्छ पीने लायक़ पानी मुहैया कराया जाए.
जब ये आदेश आया तो अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और समाजवादी पार्टी की सरकार थी लेकिन अब पूर्ण बहुमत वाली भाजपा की योगी सरकार है. राज्य में सरकार तो बदल गई है लेकिन इन छह ज़िलों के प्रभावित गांवों में शायद ही कुछ बदला है.
यहां के पानी ने कृष्णा की दुनिया ही उजाड़ दी है. कृष्णा के पति शिव कुमार 35 साल के थे और कैंसर से पीड़ित थे. डेढ़ साल पहले ही उनकी मौत हो गई. अपने तीन बच्चों के लिए अब कृष्णा ही अकेला सहारा हैं जो खेतों में मज़दूरी करके इन्हें पाल रही हैं.
पानी पिए बिना जी नहीं सकते और जैसा पानी वे पी रहे हैं उसके बाद भी उनका जीना मुश्किल है.
नदी के किनारे बसे गांव ख़ुशहाल होते हैं, गांव में नदी होना ख़ुशक़िस्मती मानी जाती है, लेकिन एक गांव है गांगनौली, इस गांव की बदक़िस्मती यही है कि वह नदी के किनारे बसा है.
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से निकलने वाली नदी हिंडन, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह ज़िलों बागपत, शामली, मुज़फ़्फ़रनगर, मेरठ और ग़ाज़ियाबाद से होती हुई यमुना में मिलती है.
इन ज़िलों के 154 गांव हिंडन और इसकी सहायक नदियों कृष्णा और काली के किनारे बसे हैं और यहां के लोग इन ज़िलों में लगे कल-कारख़ानों की क़ीमत चुका रहे हैं.
अगर ऐसा होता तो गांव के लोग नदी का पानी पीने के बदले कुएं, ट्यूबवेल या हैंडपंप का पानी पी सकते थे. लेकिन ज़हरीला पानी ज़मीन के नीचे तक पहुंच चुका है यानी अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा.
वे जानते हैं कि हर घूंट के साथ ज़हर उनके शरीर में जा रहा है. गहरा भूरा, लाल पानी पीकर बीमारियां झेलना और मरना मानो इनकी नियति बन गई है.
यहां पानी में निकल, पारा, कैडमियम, सल्फ़ाइड, क्लोराइड जैसे जानलेवा हैवी मेटल काफ़ी ज़्यादा मात्रा में है, जिसके कारण गावों के हैंडपंप का पानी ज़हरीला हो चुका है ऐसे ही 154 गांवों में से एक है गांगनौली.
ईंट और मिट्टी से बनी सड़क पर चलते हुए हमारी मुलाक़ात जितेंद्र से हुई. जब हम जितेंद्र के घर पहुंचे तो उन्होंने पड़ोसी के घर से पानी मंगाया और बताया, ''हमारे घर में लगे नल का पानी हम नहीं पिला सकते. बग़ल वालों ने फ़िल्टर लगवाए हैं तो आपके लिए पानी ले आए.''
अपनी 12 साल की बेटी नेहा को गोद में लिए जितेंद्र बताते हैं, "पैदा हुई तो एक साल तक हमें सब कुछ ठीक लगता रहा लेकिन जब ये एक साल तक चलने की कोशिश भी नहीं कर सकी तो हमने डॉक्टर को दिखाया. उन्होंने बताया कि यहां के पानी के कारण इसके दिमाग़ पर असर पड़ा है और अंगों का विकास नहीं हो पा रहा है. अब इसका कोई इलाज नहीं हो सकता है, हमने डॉक्टर के पास जाना छोड़ दिया है."
ये कहते हुए वे बेबस नज़रों से अपनी बेटी को बार-बार देखते हैं और उसका सिर सहलाते हैं. जिस उम्र में नेहा को स्कूल जाना चाहिए, अपने हमउम्र बच्चों के साथ खेलना चाहिए उस उम्र में नेहा चल-फिर तक नहीं सकती, अपने हाथों से खाना नहीं खा सकतीं. यहां तक कि वह ये भी नहीं बता सकती कि उसे कब शौचालय जाना है. नेहा अकेली नहीं है बल्कि कई ऐसे बच्चे-नौजवान इस गांव में हैं जो जन्मजात अपंगता से जूझ रहे हैं.
साल 2016 में बागपत के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर ने गांगनौली गांव में एक मेडिकल सर्वे कराया था. उनकी रिपोर्ट के मुताबिक़, इस गांव में 37 लोग कैंसर, चर्म रोग, हैपेटाइटस और अपंगता जैसी समस्या से पीड़ित थे. इनमें से कुछ की मौत भी हो चुकी है. वहीं एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक़, इस गांव में बीते दो साल में 71 लोगों की मौत कैंसर से हुई है.
साल बदला लेकिन हाल नहीं
साल 2015 में 'दोआब पर्यावरण समिति' नाम के एक संगठन की याचिका पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि जिन भी ज़िलों का पानी प्रदूषित है वहां स्वच्छ पीने लायक़ पानी मुहैया कराया जाए.
जब ये आदेश आया तो अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और समाजवादी पार्टी की सरकार थी लेकिन अब पूर्ण बहुमत वाली भाजपा की योगी सरकार है. राज्य में सरकार तो बदल गई है लेकिन इन छह ज़िलों के प्रभावित गांवों में शायद ही कुछ बदला है.
यहां के पानी ने कृष्णा की दुनिया ही उजाड़ दी है. कृष्णा के पति शिव कुमार 35 साल के थे और कैंसर से पीड़ित थे. डेढ़ साल पहले ही उनकी मौत हो गई. अपने तीन बच्चों के लिए अब कृष्णा ही अकेला सहारा हैं जो खेतों में मज़दूरी करके इन्हें पाल रही हैं.
Tuesday, November 13, 2018
छठ पर आएगी ‘निरहुआ हिंदुस्तानी 3', धूम मचाएंगे भोजपुरी के सुपरस्टार
लोक आस्था के महापर्व छठ के शुभ अवसर पर 14 नवंबर को जुबली स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ की फ़िल्म 'निरहुआ हिंदुस्तानी 3' रिलीज होगी. ये जानकारी आज खुद पटना के होटल रिपब्लिक में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दिनेशलाल यादव निरहुआ ने दी.
उन्होंने संपूर्ण बिहार वासियों को छठ पूजा की बधाई देते हुए कहा कि ‘निरहुआ हिंदुस्तानी 3’ छठ पूजा के अवसर पर भोजपुरिया समाज को निरहुआ इंटरटेंमेंट की ओर से एक बेहतरीन तोहफा है. यह फिल्म दर्शकों को दिल को छू लेने वाली है. फिल्म की कहानी से लेकर मेकिंग तक सब कुछ बेहद खास है.
‘निरहुआ हिंदुस्तानी 3’ इस सीरीज की अब तक बनी दोनों फिल्मों से भी बड़ी फिल्म है. इसलिए दर्शकों से मेरी अपील होगी कि अपनी माटी के इस खूबसूरत सिनेमा को जरूर देखें और दूसरों को भी यह फिल्म देखने के लिए इनकरेज करें. फिल्म 14 नवंबर को भगवान भाष्कर के उदीयमान होने के बाद आपके मनोरंजन के लिए सिनेमाघरों में होगी. मेरी आपसे अपील है फिल्म एक बार जरूर देखें.
निरहुआ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के कार्यकारी निर्माता हरिकेश यादव ने बताया कि निरहुआ हिंदुस्तानी के पहले दो पार्ट को दर्शकों ने खूब पसंद किया था, जिसके बाद लोगों की डिमांड भी थी कि इस फ़िल्म का और सीक्वल बने. निरहुआ हिंदुस्तानी एक पारिवारिक कथानाक वाली सीरीज है, इसलिए अब इसके तीसरे पार्ट को लेकर हम दर्शकों के सामने छठ पूजा के अवसर पर 14 नवम्बर को लेकर आ रहे हैं. हमें पूरी उम्मीद है कि यह फ़िल्म भी 'बॉर्डर' की तरह बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाएगी. हरिकेश ने निरहुआ हिंदुतानी सीरीज को आगे भी जारी रखने की बात कही है.
बता दें कि फ़िल्म में जुबली स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ, अदाकारा आम्रपाली दुबे और शुभी शर्मा के साथ संजय पांडे, किरण यादव मुख्य भूमिका में हैं.
उन्होंने संपूर्ण बिहार वासियों को छठ पूजा की बधाई देते हुए कहा कि ‘निरहुआ हिंदुस्तानी 3’ छठ पूजा के अवसर पर भोजपुरिया समाज को निरहुआ इंटरटेंमेंट की ओर से एक बेहतरीन तोहफा है. यह फिल्म दर्शकों को दिल को छू लेने वाली है. फिल्म की कहानी से लेकर मेकिंग तक सब कुछ बेहद खास है.
‘निरहुआ हिंदुस्तानी 3’ इस सीरीज की अब तक बनी दोनों फिल्मों से भी बड़ी फिल्म है. इसलिए दर्शकों से मेरी अपील होगी कि अपनी माटी के इस खूबसूरत सिनेमा को जरूर देखें और दूसरों को भी यह फिल्म देखने के लिए इनकरेज करें. फिल्म 14 नवंबर को भगवान भाष्कर के उदीयमान होने के बाद आपके मनोरंजन के लिए सिनेमाघरों में होगी. मेरी आपसे अपील है फिल्म एक बार जरूर देखें.
निरहुआ एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के कार्यकारी निर्माता हरिकेश यादव ने बताया कि निरहुआ हिंदुस्तानी के पहले दो पार्ट को दर्शकों ने खूब पसंद किया था, जिसके बाद लोगों की डिमांड भी थी कि इस फ़िल्म का और सीक्वल बने. निरहुआ हिंदुस्तानी एक पारिवारिक कथानाक वाली सीरीज है, इसलिए अब इसके तीसरे पार्ट को लेकर हम दर्शकों के सामने छठ पूजा के अवसर पर 14 नवम्बर को लेकर आ रहे हैं. हमें पूरी उम्मीद है कि यह फ़िल्म भी 'बॉर्डर' की तरह बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाएगी. हरिकेश ने निरहुआ हिंदुतानी सीरीज को आगे भी जारी रखने की बात कही है.
बता दें कि फ़िल्म में जुबली स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ, अदाकारा आम्रपाली दुबे और शुभी शर्मा के साथ संजय पांडे, किरण यादव मुख्य भूमिका में हैं.
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